पीछले साल इस तारीख़ को मेरी एक दोस्ती ख़त्म हो गयी थी | जब हमारा झगड़ा हुआ तब मैंने लम्बे वक़्त से उसे नहीं जाना था । फिर भी वह मुझे बहुत प्यारी लगती थी, और मुझे आशा थी कि वह वापस आए । उस समय पर मैंने लिखा कि "मैं उदास हूँ, लेकिन नाराज़ भी हूँ, क्योंकि उसकी बातें अनुचित थीं ।" मैं सोचती थी कि अगर वह मुझे माफ़ ही करे तो मैं उसे माफ़ भी करूँ । मैंने इंतज़ार किया, उससे फ़ोन भी किया, लेकिन वह वापस नहीं आई - सचमुच हमारी दोस्ती का मर हुआ था ।
मैं इतनी उदास थी क्योंकी वह लड़की मस्ती और रंगी थी । वह हिंदुस्तानी थी - मेरा शौक़ हिंदी भाषा और फ़िल्मों में उसे बहुत पसंद थी । वह ऐसी चीज़ों के बारे में मुझ से बात करती थी | उसने मेरे लिये कुछ सुंदर हिंदुस्तानी कपड़े चुने, जो मैंने एक वेबसाईट से मंगवाए | हम साथ साथ हिंदुस्तानी संगीत सुनती थीं | लगभग हर दिन मैं उसे देखती थी या उससे बात करती थी | मेरा छोटा समय उसके साथ बहुत प्यारा था | इस दोस्ती की क़ीमत हिंदी में समझाना मुश्किल मुझे लगता है|
आजकल कभी कभी यह लड़की मेरी याद आती है | उसकी शादी पहले नोवंबर हुई, लेकिन हमरे झगड़े के बाद हुई तो मैं वहाँ नहीं थी | आज, इस तारीख़ को, मैं उसके बारे में सोच रही हूँ, और मुझे आशा है कि उसको हर ख़ुशी है | ।
चिन्ता मत कीजिए। सच्ची दोस्ती दिल को दिल से जोड़ती है और कभी ख़त्म नहीं होती। कभी-न-कभी उसे भी आपकी याद सताएगी और वह आपको ज़रूर फ़ोन करेगी।
Posted by: Pratik Pandey | September 04, 2006 at 06:17 AM